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Friday, March 5, 2010

पर डरती हूँ

तरसती आँखों ने थे देखे हजारो सपने
पर डरती हूँ कहीं वो टूट न जाए,
इंतज़ार में हूँ एक हमसफ़र के साथ का
पर डरती हूँ कहीं साथ छूट न जाए॥

अंधेरों में बैठी हूँ रौशनी की आस लिए
कोई सूरज बन कर आए अँधेरा दूर भगाए,
अंधेरों की तो आदत हो गयी है हमे
पर डरती हूँ कहीं फिर वो सूरज डूब न जाए॥

तरसती आँखों ने थे देखे हजारो सपने.......

किनारे पे खड़ी साहिल को निहारती हूँ
कि काश कोई मुझे उस पार ले जाए,
साथ मेरे माझी भी है और नाव भी
पर डरती हूँ बीच भँवर डूब ना जाए॥

तरसती आँखों ने थे देखे हजारो सपने.......

रूठी है किस्मत रूठा है सारा जहाँ
हम है जिसके सहारे न जाने वो है कहाँ,
जाना चाहती हूँ उसके पास हमेशा के लिए
पर डरती हूँ कहीं वो भी रूठ न जाए॥

तरसती आँखों ने थे देखे हजारो सपने.......

हजारों सपने करोड़ों ख्वायिशें
अनगिनत अरमानो और प्यार का खजाना,
कितना है संजोया रखा छिपा कर सालो से
पर डरती हूँ कहीं यह खजाना लूट न जाए॥

तरसती आँखों ने थे देखे हजारो सपने
पर डरती हूँ कहीं वो टूट जाए,
इंतज़ार में हूँ एक हमसफ़र के साथ का
पर डरती हूँ कहीं साथ छूट जाए

8 comments:

निर्मला कपिला said...

इस उम्र मे इतना डर इतनी निराशा सही नहीं। जीवन तो साहस से जीया जाता है। मगर रचना बहुत अच्छी लिखी। आशीर्वाद्

Jandunia said...

खूबसूरत पोस्ट

M VERMA said...

सुन्दर रचना .. नैराश्य भाव की

hem200047 said...

@निर्मला कपिला
धन्यवाद निर्मला कपिला जी ..... हाँ थोडा सी निराश वाली कविता है। मेरी और भी रचनायें है । उन्हें एक नज़र देखे उम्मीद है आपको अच्छी लगे......कमेन्ट के लिए बहुत बहुत धन्यवाद...

@Jandunia
@M VERMA
कमेन्ट के लिए बहुत बहुत धन्यवाद...
मेरी और रचनायें एक नज़र देखे उम्मीद है आपको अच्छी लगे.....

hem200047 said...

thanks simran for reading it again.... :)

P-Kay said...

Very good poetry :) A real picture of a excited mind :D Great

simran said...

wah...maza aa gaya ...aapki poem padh ke mera dil khush ho jaata hai :-)

santosh said...

mind blowingggg.............hope u will participate in the canara hindi fest competition.....m sure ,,there will be only one winner