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Tuesday, October 21, 2008

लो आ गयी दीपावली

सजा दो हर तरफ .... लगाओ दीपो की माला.. लो आ गयी दीपावली ।
रावण का नाश कर राम-सीता जी घर लौट कर है आये... पूरी अयोध्या झूमे बन मतवाली ॥
वहां चाँद भी है गायब आसमान में... जैसे खो गया हो इस चमकती बिजलियों में ।
विजय पर्व के बाद अब आया खुशियों का त्यौहार... हर कोई है खुश यहाँ इन रोशनियों में ॥

फुलझड़ी, फिरकनी या हो अनार, रोकेट सब हो गए रौशनी में घूम ।
सब है खुशियों का प्रतीक, फिर भी है सबकी अपनी चमक अपना दूम ॥
यह पटाकों की लड़ी जली.. यह फूटा बड़ा बम ।
धूधूममम... धडाडाडाडाममम... बूमम बूमम ॥
कुछ है फुस्सी और कुछ धमाकेदार... कुछ है रंगीले... कुछ है चमकदार ।
शाम को होती मुहरत पे पूजा... सब गाते आरती गणेश जी की और लक्ष्मी जी की बार बार ॥

कितनो को शौक यहाँ बाजी लगाने का... हर कोई चाहे अपनी किस्मत को आजमाना ।
किस्मत के खेल हैं देखो कहीं दिवाली बोनस.. तो कहीं पर निकला किसी का दिवाला ॥
कहीं पर है लक्ष्मी जी की कृपा और है नए साल के अवसर पर शुभ करता गणेश जी की जय जयकार ।
सब जगह हो मंगलमय और खुशियाँ अपरमपार करके... सब दुष्टो का हो स्रंघार ॥

रंगोली है करती सब रंगों से इन खुशियों को सत सत नमस्कार ।
मिठाइयाँ है बाटते सभी..लोगो को कहते "आप पर हो प्रभु की कृपा अपरमपार" ॥
अनार की तरह सब और खुशहाली हम फैलाये, फिरकनी की भाँती हम सब जगह की सैर करके आये ।
रोकेट के सामान हम जाए बहुत दूर तक.. इन दीयों की रौशनी जैसी शुद्ध और स्वछ विचार ही मन में लाये ॥

कुछ लोग रावण के है भक्त यहाँ.. इस अवसर पर भी नहीं सोचते है भाला ।
खुद को इतना अहसाए और सही बताते.. और लेंगे कितने मासूमो की जान भला ॥
खुद तो मानव बोम्ब बन जाते.. और कितनो को यह दिवाली जैसे पावन पर्व पे दुःख है दे जाते ।
ज्यादा से ज्यादा लोगो को यह अपना निशाना बनाते.. पर अभी तक हमारी मानवता को नहीं है मिटा यह पाते ॥

रावण बहुत से है यहाँ.. मगर राम भी कम नहीं.. यह भूल जाते ।
कितना भी कुछ कर ले रावण राम की धर्म निति से कभी न वो जीत पाते ॥
आतंक के इस राक्षस को हम अपनी मानवता से ही मिटायेंगे ।
आज नहीं तो कल हम इस दिवाली को खूब धूम धाम से मनाएंगे ॥

यह लो रोकेट और candle kites फिर आसमान में दिखे ।
कितने लोगो के चेहरे पे दुःख और भय नहीं दिखे ॥
लो एक बार फिर है फुलझड़ी है जली कितने बिजली बोम्ब है फुठे ।
बस यही दुआ है मेरी की इस दिवाली लक्ष्मी जी किसी से न रूठे ॥

सबको मेरी और से दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाए ।
सबका भविष्य हो जीवंत, खुशहाल और रौशनीमय ॥
कुल के दीपक ही दीयों की तरह जलते रहे और जगमगाए ।
चाहे दिए की लौ की तरह वो कितना डगमगाए ॥
पर कही भी उनकी रौशनी इस दिए को न आग लगाए ।
आज आप उनको और कल वो आपको सहारा दे और समझाए ॥

1 comment:

aditya said...

bhut achha likha hai aapne ...aap ko hamari taraph se diwali ki hardik shubh kamnaye....